उत्तराखंड में मदरसों के पंजीकरण की रफ्तार धीमी, हरिद्वार के 271 में से सिर्फ 47 ने किया आवेदन
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने मदरसा संचालकों से जल्द पंजीकरण कराने की अपील की, बिना मान्यता संचालन पर कार्रवाई की चेतावनी

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड के भंग होने के बाद राज्य सरकार ने मदरसों की मान्यता और निगरानी के लिए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। नए नियमों के तहत अब सभी मदरसों का शिक्षा विभाग के अंतर्गत पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि हरिद्वार में इस प्रक्रिया की रफ्तार काफी धीमी दिखाई दे रही है। जिले के 271 मदरसों में से अब तक केवल 47 संचालकों ने ही मान्यता के लिए आवेदन किया है।
इसी स्थिति को देखते हुए मंगलवार को हरिद्वार के रोशनाबाद स्थित जिला कार्यालय सभागार में उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी की अध्यक्षता में मदरसा संचालकों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

बैठक के दौरान डॉ. गांधी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाना है। उन्होंने सभी मदरसा संचालकों से निर्धारित मानकों और आवश्यक दस्तावेजों के साथ जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की अपील की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना मान्यता के किसी भी मदरसे में शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई संस्था बिना मान्यता के मदरसा संचालित करती हुई पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. गांधी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सभी मदरसा संचालकों से समन्वय स्थापित कर उन्हें पंजीकरण प्रक्रिया की पूरी जानकारी दें और तय समय सीमा के भीतर पात्र मदरसों का पंजीकरण सुनिश्चित करें।
बैठक में जिला माध्यमिक शिक्षा अधिकारी अभिषेक शुक्ला ने बताया कि हरिद्वार जिले में कुल 271 मदरसे संचालित हैं। इनमें से 47 मदरसों ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया है। अब तक 5 मदरसों को मान्यता मिल चुकी है, जबकि 18 आवेदनों पर 29 जुलाई को विचार किया जाएगा। शेष 24 आवेदनों का स्थलीय निरीक्षण किया जाना है, जिसके बाद मानकों के अनुरूप पाए जाने पर उन्हें मान्यता दी जाएगी।
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डॉ. गांधी ने यह भी कहा कि जिन मदरसों का संचालन बंद हो चुका है, वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का प्रवेश नजदीकी सरकारी विद्यालयों में कराया जाए ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
बैठक में मौजूद मुस्लिम समाजसेवी हाफिज राहीबदुल्ला ने भी मदरसा संचालकों से सरकार के नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा भी समय की आवश्यकता है और विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए सभी मदरसों को निर्धारित नियमों के अनुसार पंजीकरण कराना चाहिए।