खराब मौसम से भारत-चीन सीमा व्यापार प्रभावित, तकलाकोट में भारी बर्फबारी से कारोबारियों की चिंता बढ़ी
छह साल बाद शुरू हुए सीमांत व्यापार पर कड़ाके की ठंड और समय से पहले हुई बर्फबारी का असर, सीमित व्यापार अवधि को लेकर संशय गहराया

देहरादून: पिथौरागढ़ जिले से लगे भारत-चीन सीमा क्षेत्र में अचानक बदले मौसम के मिजाज ने सीमांत कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तिब्बत स्थित प्रसिद्ध तकलाकोट मंडी में करीब डेढ़ फीट तक बर्फबारी दर्ज की गई है, जिससे चारों ओर बर्फ की मोटी चादर बिछ गई है। सितंबर के अंत में ही तापमान में भारी गिरावट आने और कड़ाके की ठंड शुरू होने से व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका बन गई है।
कोरोना महामारी और अन्य तकनीकी कारणों से लगभग छह वर्षों तक स्थगित रहने के बाद इस वर्ष लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार को फिर से शुरू किया गया था। सामान्य तौर पर जून से अक्टूबर तक चलने वाला यह व्यापार इस बार अनुमति मिलने में देरी के कारण अगस्त में ही औपचारिक रूप से शुरू हो सका था। कारोबार के लिए बेहद कम समय मिलने के बाद अब मौसम के रुख ने व्यापारियों की चिंता और अधिक बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार, इस वर्ष दर्जनों व्यापारियों ने सीमा पार व्यापार के लिए पास बनवाए थे और कई दल लाखों रुपये का सामान लेकर तकलाकोट के लिए रवाना हुए थे। प्रारंभिक दौर में गए कुछ कारोबारी चीन की मंडी से सामान बेचकर लौट भी चुके थे और वहां के बाजार को लेकर सकारात्मक उम्मीदें जता रहे थे। हालांकि, अब भी कई व्यापारी अपना सामान लेकर वहां पहुंचने की प्रक्रिया में हैं, लेकिन अचानक हुई भारी बर्फबारी के कारण उनके सामने आवाजाही और रुकने की गंभीर चुनौती पैदा हो गई है।
उधर, भारतीय सीमा के भीतर भी मुनस्यारी के मल्ला जोहार और धारचूला की व्यास घाटी में सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई है। कुटी, गुंजी, नाभीढांग और आदि कैलाश की ऊंची चोटियां बर्फ से ढक गई हैं। अक्टूबर के अंत तक चलने वाले इस व्यापारिक सत्र से ठीक पहले हुए इस हिमपात से पूरी तरह कारोबार सिमटने का खतरा मंडराने लगा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलने वाली संजीवनी पर असर पड़ता दिख रहा है।