किशाऊ बांध परियोजना के खिलाफ मुखर हुए सीमांत ग्रामीण, उपजाऊ भूमि और विस्थापन को लेकर जताया कड़ा विरोध
उत्तराखंड और हिमाचल के दो दर्जन गांवों के लोगों ने एकजुट होकर खोला मोर्चा, बांध का स्थल बदलने और पारदर्शी पुनर्वास नीति की उठाई मांग
देहरादून: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टौंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर जन-आक्रोश गहराने लगा है। परियोजना के वर्तमान स्वरूप और प्रस्तावित स्थल को लेकर सीमांत क्षेत्रों के करीब 20 गांवों के प्रभावित निवासियों ने जोरदार प्रदर्शन किया है। स्थानीय ग्रामीणों ने सड़क जाम कर अपना विरोध दर्ज कराया और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपनी जमीनों तथा सांस्कृतिक अस्तित्व की रक्षा करने की गुहार लगाई।
ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पुरानी इस परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय निवासियों के साथ कोई औपचारिक संवाद या जन-सुनवाई नहीं की गई। परियोजना के कारण क्षेत्र की सैकड़ों हेक्टेयर सबसे उपजाऊ कृषि भूमि जलमग्न होने की कगार पर है, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। इसके अलावा, आंदोलनकारियों ने भौगोलिक संवेदनशीलता का हवाला देते हुए दावा किया है कि वर्तमान चयनित स्थल की चट्टानें मजबूत नहीं हैं और वहां भू-धंसाव का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय प्रतिनिधियों की मुख्य मांग है कि परियोजना का विरोध विकास के खिलाफ नहीं, बल्कि बिना योजना के किए जा रहे विस्थापन और नुकसान के खिलाफ है। ग्रामीणों ने सुझाव दिया है कि बांध के प्रस्तावित स्थल को कुछ किलोमीटर आगे किसी अधिक सुरक्षित और सख्त चट्टानी क्षेत्र की ओर स्थानांतरित किया जाए, ताकि उपजाऊ भूमि और घनी आबादी वाले गांवों को डूबने से बचाया जा सके। साथ ही, प्रभावितों के लिए पारदर्शी विस्थापन नीति और उचित मुआवजे की गारंटी की भी मांग की गई है।
उल्लेखनीय है कि कई राज्यों के बीच जल और बिजली बंटवारे से जुड़ी यह अति-महत्वाकांक्षी जलविद्युत परियोजना हजारों करोड़ रुपये की लागत से तैयार होनी है, जिससे सैकड़ों मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, हजारों लोगों के विस्थापन और कृषि भूमि के जलमग्न होने की आशंका ने अब इस बड़े प्रोजेक्ट के सामने जन-प्रतिरोध की चुनौती खड़ी कर दी है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।