उत्तर प्रदेश

जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल; शिक्षा सुधार और जवाबदेही की मांग तेज

प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च के दौरान लाठीचार्ज का आरोप लगाया, महिलाओं और छात्रों के साथ मारपीट का दावा; देशभर से ऑनलाइन मिल रहा समर्थन और राहत सामग्री।

इस बीच जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को देशभर से समर्थन भी मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, जो लोग धरनास्थल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे फूड डिलीवरी ऐप्स के जरिए भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामान भेजकर अपना समर्थन जता रहे हैं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई, सरकार की जवाबदेही तय करना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग शामिल है। उनका कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन लगातार चर्चा में है। आंदोलन में शामिल छात्रों और समर्थकों ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, इसके बावजूद पुलिस ने बल प्रयोग किया।

प्रदर्शन में शामिल एक छात्रा ने बताया कि आंदोलन के दौरान लोग शांतिपूर्वक अपनी मांगों को लेकर नारे लगा रहे थे और माहौल नियंत्रण में था। उनके अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड तक पहुंचे जरूर, लेकिन स्थिति ऐसी नहीं थी कि लाठीचार्ज की आवश्यकता पड़े। उनका आरोप है कि पुलिस ने महिलाओं, छात्रों और यहां तक कि बच्चों के साथ भी सख्ती की।

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि कुछ वीडियो में महिला प्रदर्शनकारियों और छात्रों के साथ बल प्रयोग के दृश्य भी नजर आते हैं। उनका तर्क है कि यदि पर्याप्त पुलिस बल पहले से मौजूद था, तो हालात को बिना बल प्रयोग के भी संभाला जा सकता था।

छात्रों का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है और सरकार से सवाल पूछना भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में जिस तत्परता की अपेक्षा होती है, वैसी सक्रियता अक्सर देखने को नहीं मिलती, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया जाता है।

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए। उनका कहना है कि आंदोलनकारी केवल अपनी मांगों पर सरकार से जवाब चाहते थे, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय बल प्रयोग किया

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