
पिथौरागढ़/देहरादून: उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे नई पहचान दिलाने वाले कलाकारों के सम्मान में ‘उत्तराखंड यूके अवार्ड 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। इस गौरवशाली समारोह में पिथौरागढ़ के सुप्रसिद्ध कलाकार शमशाद पिथौरागढ़ी को उनके तीन दशकों के अथक समर्पण के लिए ‘उत्तराखंड गौरव सम्मान’ से अलंकृत किया गया।

तीन दशकों की कला साधना का सम्मान
शमशाद पिथौरागढ़ी पिछले 30 वर्षों से उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला ‘ऐपण’ (Aipan) के संरक्षण और संवर्धन में जुटे हैं। उनके इस योगदान को देखते हुए डॉ. प्रमोद अग्रवाल ‘गोल्डी’ द्वारा उन्हें प्रशासनिक पत्र, प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने शमशाद के धैर्य और कला के प्रति उनकी अटूट निष्ठा की सराहना की, जिन्होंने आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों को जीवित रखा है।
विविध क्षेत्रों के कलाकार हुए गौरवान्वित
यह सम्मान समारोह एक ISO सर्टिफाइड संस्था द्वारा आयोजित किया गया, जो प्रतिवर्ष उत्तराखंड की संस्कृति, कला और लोक विधाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चुनिंदा कलाकारों को मंच प्रदान करती है। इस वर्ष भी विभिन्न श्रेणियों में प्रदेश का नाम रोशन करने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया:
मंजू टम्टा: उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा ‘पिछौड़ा’ पर विशेष कार्य करने और इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
अभिषेक जोशी: संगीत के क्षेत्र में, विशेषकर तबला वादन में अपनी निपुणता और शास्त्रीय संगीत की सेवा के लिए उन्हें यह सम्मान मिला।
संस्कृति के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व
सम्मान समारोह के मुख्य आयोजक डॉ. प्रमोद अग्रवाल ‘गोल्डी’ ने कहा कि हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है। उन्होंने जोर दिया कि शमशाद पिथौरागढ़ी जैसे कलाकार आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणापुंज हैं। यह पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि उन हाथों का आभार है जो देवभूमि की कला को उकेर रहे हैं।
समारोह के अंत में सभी सम्मानित कलाकारों ने उत्तराखंड की संस्कृति को विश्व पटल पर और अधिक मजबूती से स्थापित करने का संकल्प लिया। स्थानीय प्रबुद्धजनों और कला प्रेमियों ने सभी विजेताओं को शुभकामनाएं देते हुए इसे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बताया।