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हरीश रावत के रोड शो पर गरमाई सियासत, भाजपा ने उठाए सवाल; चमोली बोले- आखिर किसे ताकत दिखा रहे हैं हरदा?

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत के उत्तराखंड लौटने के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल बढ़ गई है। रावत के स्वागत में प्रस्तावित रोड शो को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं ने इस कार्यक्रम को महज स्वागत तक सीमित न मानते हुए इसके राजनीतिक मायने पर सवाल खड़े किए हैं।

भाजपा विधायक विनोद चमोली ने रावत पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ इस्तीफे की पेशकश और दूसरी तरफ जोरदार स्वागत का कार्यक्रम—इन दोनों घटनाक्रमों को एक साथ देखा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि रोड शो के जरिए रावत कांग्रेस संगठन के भीतर अपनी राजनीतिक ताकत का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।

चमोली का सवाल- अगर सब ठीक है तो शक्ति प्रदर्शन क्यों?

विनोद चमोली ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस में सबकुछ सामान्य है और रावत की पार्टी में भूमिका को लेकर कोई विवाद नहीं है, तो फिर इतने बड़े स्तर पर शक्ति प्रदर्शन की जरूरत क्यों पड़ी।

उन्होंने रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल को लेकर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। चमोली का कहना है कि उस दौर से जुड़े मामलों को लेकर आज भी सवाल उठते रहे हैं और कई मामलों की चर्चा समय-समय पर सामने आती रही है। हालांकि, ये भाजपा नेता द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।

चमोली ने यह भी आरोप लगाया कि रावत रोड शो के माध्यम से कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने रावत की राजनीतिक गतिविधियों को कांग्रेस के भीतर चल रहे समीकरणों से जोड़कर देखा।

मुन्ना चौहान ने कार्यक्रम के मकसद पर उठाया सवाल

भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने रोड शो के उद्देश्य को लेकर अलग सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह शक्ति प्रदर्शन आखिर किसके लिए है।

चौहान के मुताबिक, क्या इसके जरिए कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को संदेश दिया जा रहा है, प्रदेश संगठन में अपनी ताकत दिखाई जा रही है या फिर समर्थकों के बीच राजनीतिक पकड़ का प्रदर्शन किया जा रहा है? उन्होंने रावत के कार्यक्रम को कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक प्रभाव को लेकर चल रही चर्चाओं से जोड़ते हुए निशाना साधा।

सुरेश जोशी बोले- ऐसे कार्यक्रमों से चुनावी तस्वीर नहीं बदलती

भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता सुरेश जोशी ने भी रावत के रोड शो पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के स्वागत कार्यक्रम और शक्ति प्रदर्शन आगामी चुनाव की तस्वीर को प्रभावित नहीं कर सकते।

जोशी ने रावत के चुनावी राजनीतिक रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और दावा किया कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है। हालांकि, 2027 के चुनावी परिणामों को लेकर उनका दावा राजनीतिक बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

दिल्ली से लौटने के बाद कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत

दरअसल, हरीश रावत हाल ही में दिल्ली से उत्तराखंड लौटे हैं। हरिद्वार पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। रावत ने रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर श्रद्धांजलि दी और बाद में गंगा पूजा भी की। देहरादून पहुंचने पर भी अलग-अलग क्षेत्रों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से उनके स्वागत के कार्यक्रम हुए।

रावत ने इस दौरान पार्टी से जुड़े सवालों पर कहा कि वह फिलहाल कांग्रेस के एक सिपाही हैं और पार्टी का निर्णय उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने यह भी कहा कि वह जल्द कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात करेंगे।

2027 से पहले बढ़ेगी बयानबाजी?

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे में किसी बड़े नेता के स्वागत, रोड शो या सार्वजनिक कार्यक्रम को लेकर सियासी प्रतिक्रियाएं सामने आना स्वाभाविक है।

हरीश रावत का रोड शो भी इसी राजनीतिक माहौल में चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस की ओर से इसे किस रूप में पेश किया जाता है और भाजपा इसे किस तरह मुद्दा बनाती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि रावत की सक्रियता ने उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज कर दिया है।

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