उत्तराखंड में पैदल चलना हुआ जोखिम भरा, सड़कों पर बढ़ता हादसों का ग्राफ
फुटपाथ पर अतिक्रमण और तेज रफ्तार गाड़ियां बनीं राहगीरों के लिए मुसीबत, आंकड़ों में सामने आई चिंताजनक स्थिति

देहरादून: उत्तराखंड की सड़कों पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों में पैदल चलने वाले राहगीरों के हताहत होने की दर चिंताजनक रूप से बढ़ी है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इस साल के शुरुआती सात महीनों के भीतर प्रदेश भर में हुई सड़क दुर्घटनाओं में पैदल चल रहे 150 से अधिक लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है।
सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि कुल हादसों में वाहनों की आपसी भिड़ंत के बाद पैदल राहगीरों के शिकार होने के मामले दूसरे स्थान पर हैं। राज्य में जनवरी से जुलाई के बीच दर्ज 1,200 से अधिक सड़क हादसों में कुल 775 लोगों की मृत्यु हुई और 1,300 से अधिक लोग घायल हुए। इनमें से केवल पैदल यात्रियों और वाहनों के बीच टक्कर की करीब 280 घटनाएं हुईं, जो राहगीरों की सुरक्षा के मामले में जमीनी स्थिति की पोल खोलती हैं।
इस भयावह स्थिति के पीछे का सबसे प्रमुख कारण सड़कों के किनारे बने फुटपाथों पर हुआ अवैध कब्जा और अतिक्रमण है। कई इलाकों में दुकानों का सामान, अस्थाई ठेले, अनधिकृत पार्किंग और निर्माण सामग्री बिखरी रहने के कारण पैदल चलने वालों के लिए जगह ही नहीं बचती। ऐसे में मजबूरीवश बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और अन्य राहगीरों को व्यस्त सड़कों पर उतरकर चलना पड़ता है, जहां वे तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ जाते हैं।
हादसों के समय और महीनों के अध्ययन से पता चलता है कि राज्य में जून और जुलाई के महीनों में दुर्घटनाओं का ग्राफ सबसे अधिक रहा। वहीं, समय के लिहाज से शाम 6:00 बजे से रात 9:00 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, राहगीरों द्वारा जेब्रा क्रॉसिंग या ट्रैफिक सिग्नल का पालन न करते हुए अचानक सड़क पार करना और ड्राइवरों द्वारा अनियंत्रित गति से वाहन चलाना भी इन दुर्घटनाओं की मुख्य वजहों में शामिल हैं।
सड़क हादसों पर अंकुश लगाने और पैदल यात्रियों को सुरक्षित माहौल देने के लिए प्रशासन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नई नियमावली और एकीकृत कार्ययोजना पर काम कर रहा है। इसके तहत फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने, शहरी सड़कों के डिजाइन में पैदल पथ (पैदल मार्ग) को प्राथमिकता देने, फुटओवर ब्रिज का निर्माण करने और ओवरस्पीडिंग पर नकेल कसने की तैयारी की जा रही है। बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ-साथ आम जनता में यातायात नियमों और सड़क पार करते समय बरती जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूकता ही इस जानलेवा सिलसिले को रोक सकती है।