उत्तराखंड में कुदरत की मार: बारिश और आपदा से 41 हेक्टेयर से अधिक फसल तबाह, किसान परेशान
खरीफ फसलों पर पड़ा मानसून का भारी असर, पर्वतीय जिलों में कृषि भूमि और फसलों को पहुंचा बड़ा नुकसान

देहरादून: उत्तराखंड में इस वर्ष मानसून की बारिश और आपदा ने किसानों की कमर तोड़ दी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में हुई मूसलाधार बारिश, भूस्खलन और जलभराव के कारण खरीफ की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। तैयार की गई आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश भर में लगभग 41.908 हेक्टेयर फसल क्षेत्र बारिश और प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आकर प्रभावित हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा में धान, मक्का, मंडुवा, झंगोरा और सब्जियों जैसी प्रमुख फसलों की व्यापक बर्बादी हुई है।
बारिश का सबसे भयानक असर पर्वतीय इलाकों में देखने को मिला है, जिनमें चंपावत जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां अकेले 27.390 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है, जो प्रदेश भर में हुए कुल नुकसान का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है। चंपावत के अलावा रुद्रप्रयाग में 5.1 हेक्टेयर, नैनीताल में 5 हेक्टेयर, उत्तरकाशी में 3.55 हेक्टेयर और अल्मोड़ा व चमोली जैसे अन्य जिलों में भी फसलों को खासा नुकसान पहुंचा है।
आंकड़ों पर गौर करें तो प्रभावित कुल क्षेत्र में से 31 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर 33 प्रतिशत से ज्यादा की फसल क्षति दर्ज की गई है, जो किसानों की आजीविका के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है। पर्वतीय क्षेत्रों में खेतों के बहने और मलबे की वजह से मिट्टी की उर्वरता पर भी असर पड़ा है।
मौसम की इस मार को देखते हुए प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर पीड़ित किसानों को उचित राहत और मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। वहीं, स्थानीय किसानों और कृषि संगठनों ने मांग की है कि आपदा राहत कोष से प्रभावितों को तुरंत आर्थिक मदद दी जाए, ताकि वे आगामी फसल की तैयारी कर सकें और कर्ज के बोझ से बच सकें।