उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त: हरिद्वार की गंगनहर और देहरादून के नाले पर अतिक्रमण के मामलों में कार्रवाई के निर्देश

नैनीताल: उत्तराखंड में जलस्रोतों और नालों के आसपास अतिक्रमण के मामलों पर हाईकोर्ट ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। हरिद्वार के पीरान कलियर क्षेत्र में गंगनहर के किनारे अतिक्रमण और देहरादून के क्लेमेंटटाउन में नाले पर अवैध कब्जे से जुड़े दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रभावित पक्षों के प्रत्यावेदनों पर तय समयसीमा में निर्णय लेने को कहा।
गंगनहर के आसपास अतिक्रमण का मामला
पीरान कलियर निवासी संदीप शर्मा ने जनहित याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि गंगनहर के किनारे और उसके आसपास दुकानों, मकानों तथा सब्जी की रेहड़ियों के जरिए अतिक्रमण किया जा रहा है। इससे आसपास के रास्तों पर जाम की स्थिति बनती है और किसी अप्रिय घटना का खतरा भी बना रहता है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन को निर्देश देने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि नहर की देखरेख उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन है। इसके बाद हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को संबंधित विभागों के समक्ष प्रत्यावेदन देने को कहा। अदालत ने निर्देश दिया कि इस पर तीन महीने के भीतर नियमानुसार निर्णय लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
क्लेमेंटटाउन में नाले पर कब्जे का मामला
दूसरे मामले में क्लेमेंटटाउन निवासी संजय कुमार ने भारुवाला क्षेत्र में नाले और उसके आसपास अतिक्रमण का मुद्दा उठाया। याचिका के मुताबिक, नाला आगे चलकर बिंदाल नदी में मिलता है। अतिक्रमण के कारण नाले का रास्ता प्रभावित होने और जलभराव का खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई।
सुनवाई के दौरान सरकार और कैंट बोर्ड ने नाले के आसपास अतिक्रमण होने की जानकारी दी। संबंधित विभागों की टीम बनाकर अतिक्रमण चिह्नित करने और प्रभावित लोगों का पक्ष सुनने की बात भी कही गई।
हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए जिलाधिकारी देहरादून को छह महीने के भीतर प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने के निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई से पहले संबंधित अतिक्रमणकारियों का पक्ष भी सुना जाए।