
नई दिल्ली: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की गुहार एक बार फिर देश की राजधानी की सड़कों पर गूंज उठी है। दिवंगत अंकिता भंडारी के माता-पिता आज दिल्ली स्थित इंडिया गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। परिवार का यह विरोध प्रदर्शन इस मामले से जुड़े कथित ‘वीआईपी’ को पूर्वोत्तर के एक राज्य में राज्यपाल बनाए जाने की खबरों के बाद शुरू हुआ है। परिजनों की स्पष्ट मांग है कि जब तक मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी संवैधानिक पद पर नियुक्ति नहीं होनी चाहिए।
धरने की सूचना मिलते ही सियासी गलियारों में भी हलचल तेज हो गई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी अन्य नेताओं के साथ अंकिता के माता-पिता से मिलने इंडिया गेट पहुंचे और परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
चार साल से अंकिता भंडारी के परिवार को इंसाफ नहीं मिला, लेकिन एक ‘VIP’ आरोपी को संरक्षण और संवैधानिक पद का इनाम ज़रूर मिला।
जहां बलात्कारियों और हत्यारों का फूल-मालाओं से स्वागत होता है और अपराधियों को सत्ता की ताकत से नवाज़ा जाता है – उस महिला-विरोधी BJP से कोई उम्मीद की भी नहीं… pic.twitter.com/i598S7zG7t
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 14, 2026
“उन्हें जेल में होना चाहिए, राजभवन में नहीं”: पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी इंडिया गेट पर धरने पर बैठे अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने अपनी लाचारी और गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि जब तक जांच पूरी न हो, तब तक किसी को भी संरक्षण या बड़ा पद नहीं दिया जाना चाहिए।
वीरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा: “कथित वीआईपी को इस वक्त जेल में होना चाहिए था। मैं माननीय राष्ट्रपति महोदया से विनम्र अनुरोध करता हूं कि जब तक सीबीआई की जांच पूरी न हो जाए, तब तक उन्हें राज्यपाल नियुक्त न किया जाए। नियुक्ति की इस खबर ने हमें भीतर से तोड़ दिया है। जब से यह खबर आई है, अंकिता की मां रात भर रोती रही हैं। आज हमें अपना दुख और मांग लेकर मजबूरन दिल्ली की सड़कों पर आना पड़ा है।”
दिल्ली: अंकिता भंडारी मामले पर मृतक अंकिता भंडारी के पिता ने कहा, “मेरी बेटी की हत्या 18 सितंबर, 2022 को हुई थी। तीन आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई, लेकिन मुख्य आरोपी एक VIP था जो उसकी हत्या के लिए ज़िम्मेदार था। निचली अदालत में सुनवाई के दौरान, हमने… pic.twitter.com/GG5gWOW5Lz
— IANS Hindi (@IANSKhabar) October 14, 2026
अंकिता की मां सोनी देवी धरने के दौरान बेहद भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि यह फैसला उनकी भावनाओं और उनकी बेटी के साथ हुए अन्याय पर गहरा आघात है।
सोनी देवी ने नम आंखों से कहा: “12 तारीख को जब हमने यह सुना कि उन्हें गवर्नर बनाया जा रहा है, तो हमें बहुत गहरा दुख हुआ। मेरे पास अपनी पीड़ा बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं। मैं माननीय राष्ट्रपति जी से अपील करती हूं—वह खुद एक महिला हैं और एक मां के दर्द को बखूबी समझ सकती हैं। हमारी प्रार्थना है कि जब तक इस मामले में सीबीआई की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक नियुक्ति की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।”
इंडिया गेट पर प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सीधे अंकिता के परिजनों से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं ने जमीन पर बैठकर पीड़ित माता-पिता की बात सुनी और उन्हें सांत्वना दी।
राहुल गांधी ने परिवार को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे इस मुश्किल घड़ी में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अंकिता को इंसाफ दिलाने की इस लड़ाई में कांग्रेस पार्टी परिवार की हरसंभव कानूनी और नैतिक मदद करेगी। प्रियंका गांधी ने भी कहा कि न्याय मिलने से पहले इस तरह की नियुक्तियां जनता के विश्वास को चोट पहुंचाती हैं।
‘वीआईपी’ का अनसुलझा रहस्य और सीबीआई जांच
उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या के बाद से ही इस मामले में एक अज्ञात ‘वीआईपी’ की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। रिजॉर्ट में आने वाले इस वीआईपी को “स्पेशल सर्विस” देने के दबाव के आरोप के बाद ही अंकिता की हत्या का मामला सामने आया था।
बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अंकिता के माता-पिता ने भेंट के दौरान CBI जांच की मांग रखी थी जिसका सम्मान करते हुए हमारी सरकार ने इस मामले की जांच CBI से कराने का निर्णय लिया है।
मातृशक्ति की सुरक्षा एवं उनके सम्मान के लिए हमारी सरकार सदैव… pic.twitter.com/bl2KkYJPHu
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) January 9, 2026
जनता के भारी आक्रोश के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति की थी। सरकार की ओर से तब यह साफ किया गया था कि जांच एजेंसी का मुख्य फोकस घटना से जुड़े ‘वीआईपी’ एंगल और उसकी संलिप्तता से पर्दा उठाने पर रहेगा। अब परिजनों का कहना है कि जब तक केंद्रीय एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक किसी भी संदिग्ध चेहरे को संवैधानिक सुरक्षा कवच देना जांच को प्रभावित कर सकता है।