उत्तरकाशी | 20 अप्रैल, 2026
- उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा का रविवार, 19 अप्रैल से भव्य शुभारंभ हो गया है। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया। यात्रा के पहले ही दिन अटूट श्रद्धा का नजारा देखने को मिला, जहाँ 10,000 से अधिक तीर्थयात्रियों ने मां गंगा और मां यमुना के चरणों में शीश नवाया।
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डोली यात्रा के साथ खुले कपाट
रविवार को मां गंगा की उत्सव डोली अपने शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा से जयकारों के बीच गंगोत्री धाम पहुंची। वहीं, मां यमुना की डोली ने खरसाली से प्रस्थान कर यमुनोत्री धाम में प्रवेश किया। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दोनों धामों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
पहले दिन का सांख्यिकीय विवरण
जिला सूचना अधिकारी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पहले दिन यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया।
दर्शन करने वाले कुल श्रद्धालु:
यमुनोत्री धाम: 9,550 (बाहरी और स्थानीय मिलाकर)
गंगोत्री धाम: 3,050 (बाहरी और स्थानीय मिलाकर)
तीर्थयात्रियों का वर्गीकरण (मुख्य आंकड़े):
दोनों धामों में कुल 9,800 मुख्य तीर्थयात्री पहुंचे, जिनमें शामिल थे:
पुरुष: 5,503
महिलाएं: 4,033
बच्चे: 264
इसके अतिरिक्त, स्थानीय श्रद्धालुओं और देव डोलियों की भी सक्रिय भागीदारी रही, जिसमें गंगोत्री में 1,450 और यमुनोत्री में 1,350 स्थानीय लोगों ने दर्शन किए।
शून्य से नीचे तापमान, फिर भी अडिग विश्वास
इस वर्ष यात्रा की शुरुआत कड़ाके की ठंड के साथ हुई है। धामों में तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे (माइनस) दर्ज किया जा रहा है, लेकिन बर्फबारी और हाड़ कंपाने वाली ठंड भी भक्तों के उत्साह को कम नहीं कर पाई।
धामों का वर्तमान तापमान:
धाम अधिकतम तापमान न्यूनतम तापमान
गंगोत्री -1°C -12°C
यमुनोत्री 3°C -4°C
केदारनाथ -2°C -10°C
बदरीनाथ 2°C -8°C
अब केदारनाथ और बदरीनाथ का इंतजार
गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट खुलने के बाद अब सबकी नजरें केदारनाथ और बदरीनाथ धाम पर टिकी हैं।
22 अप्रैल: रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे।
23 अप्रैल: चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे।
इन दोनों धामों के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की चारधाम यात्रा पूर्ण रूप से गतिमान हो जाएगी। प्रशासन ने भारी भीड़ और ठंड को देखते हुए पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।