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यूरोप की तर्ज पर बने देहरादून मास्टर प्लान-2041, केवल सड़कें नहीं बल्कि नागरिकों का स्वास्थ्य, पर्यावरण और भविष्य भी हो प्राथमिकता : देहरादून साइक्लिंग क्लब

देहरादून साइक्लिंग क्लब ने उठाए महत्वपूर्ण सुझाव, कहा— लक्ष्य, समय-सीमा और जवाबदेही के बिना मास्टर प्लान अधूरा

देहरादून, 21 जुलाई। देहरादून साइक्लिंग क्लब ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) से मांग की है कि देहरादून मास्टर प्लान-2041 को अंतिम रूप देने से पूर्व चंद्रबनी स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) में आयोजित अंतिम जनसुनवाई में प्राप्त सभी आपत्तियों एवं सुझावों को गंभीरता से शामिल किया जाए। क्लब का कहना है कि मास्टर प्लान केवल भवन निर्माण और भूमि उपयोग का दस्तावेज नहीं होना चाहिए, बल्कि आने वाले 15 वर्षों के लिए देहरादून के स्वास्थ्य, पर्यावरण, यातायात, जल सुरक्षा और जीवन गुणवत्ता का रोडमैप होना चाहिए।

क्लब के अध्यक्ष हरिसिमरन सिंह ने कहा कि मास्टर प्लान का विज़न सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर परिवहन व्यवस्था की बात तो करता है, लेकिन इसमें समयबद्ध लक्ष्य , मापनीय परिणाम और जवाबदेही  का स्पष्ट अभाव है। यूरोप के शहर जैसे कोपेनहेगन, एम्स्टर्डम और वियना अपने मास्टर प्लान में यह स्पष्ट बताते हैं कि कितने प्रतिशत लोग सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे, कितने प्रतिशत लोग साइकिल से यात्रा करेंगे, प्रति व्यक्ति कितनी हरित भूमि उपलब्ध होगी, वायु गुणवत्ता के मानक क्या होंगे तथा कार्बन उत्सर्जन में कितनी कमी लाई जाएगी। जबकि देहरादून मास्टर प्लान-2041 में ऐसे स्पष्ट लक्ष्य दिखाई नहीं देते।

देहरादून साइक्लिंग क्लब ने सुझाव दिया कि वर्ष 2041 तक कम से कम 30 से 40 प्रतिशत यात्राएं सार्वजनिक परिवहन से, 20 से 25 प्रतिशत यात्राएं साइकिल से, 100 प्रतिशत सीवरेज ट्रीटमेंट, शून्य बिना उपचारित ठोस कचरा निस्तारण, प्रत्येक नागरिक को 300 मीटर के भीतर पार्क की उपलब्धता तथा नए विकास क्षेत्रों में न्यूनतम 25 प्रतिशत किफायती आवास (Affordable Housing) जैसे स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जाएं।

क्लब ने कहा कि वर्तमान मास्टर प्लान में सड़क, पेयजल, सीवरेज, ड्रेनेज, पार्किंग, सार्वजनिक पार्क, खेल मैदान, वायु गुणवत्ता, पर्यावरण संरक्षण, भूजल रिचार्ज, जल गुणवत्ता संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन जैसी मूलभूत चुनौतियों पर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं देती। आज देहरादून की पहचान उसकी हरियाली, जंगलों, स्वच्छ हवा, प्राकृतिक जलधाराओं और सुंदर प्राकृतिक वातावरण से है, लेकिन अनियोजित विकास, लगातार पेड़ों की कटाई और बढ़ते कंक्रीट के जंगल इस पहचान पर गंभीर संकट खड़ा कर रहे हैं।

क्लब ने विशेष रूप से कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य, फिटनेस और प्रदूषण नियंत्रण के लिए साइक्लिंग को प्राथमिकता नहीं दी गई है। मास्टर प्लान में केवल “सिटीवाइड साइक्लिंग नेटवर्क” का सामान्य उल्लेख किया गया है, जबकि विश्व के अग्रणी शहरों में साइकिल केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि दैनिक परिवहन का प्रमुख माध्यम है।

यूरोप के शहरों की तर्ज पर देहरादून में भी सुरक्षित एवं पृथक साइकिल ट्रैक, साइकिल हाईवे, ग्रीन साइक्लिंग कॉरिडोर, प्रत्येक सरकारी कार्यालय में साइकिल पार्किंग, सार्वजनिक साइकिल शेयरिंग सिस्टम, स्कूल एवं कॉलेजों के लिए सुरक्षित साइकिल मार्ग, बस एवं रेलवे से साइक्लिंग का एकीकरण तथा 18 मीटर से अधिक चौड़ी सभी सड़कों पर अनिवार्य साइकिल ट्रैक विकसित किए जाने चाहिए। इसके अतिरिक्त वन क्षेत्रों में माउंटेन बाइक (MTB) ट्रेल विकसित कर इको-टूरिज्म, एडवेंचर स्पोर्ट्स और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं।

देहरादून साइक्लिंग क्लब ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में ट्रैफिक जाम कम करना चाहती है तो केवल सड़कों का चौड़ीकरण समाधान नहीं है। सबसे पहले यह सोचना होगा कि लोगों को निजी वाहन खरीदने की आवश्यकता ही क्यों पड़े? इसके लिए सार्वजनिक परिवहन को इतना सस्ता, सुरक्षित, समयबद्ध और सुविधाजनक बनाया जाए कि नागरिक स्वेच्छा से बसों एवं अन्य सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाली बस सेवा, समर्पित बस लेन, अंतिम मील (Last Mile) कनेक्टिविटी, पार्क-एंड-राइड सुविधा, स्मार्ट टिकटिंग तथा ऋषिकेश, हरिद्वार, मसूरी और आसपास के क्षेत्रों से बेहतर क्षेत्रीय संपर्क विकसित किया जाना चाहिए।

क्लब ने यह भी कहा कि यातायात प्रबंधन और पार्किंग, जो वर्तमान में देहरादून की सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल हैं, उन पर मास्टर प्लान अपेक्षाकृत मौन दिखाई देता है। शहर को आधुनिक इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल, रियल टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग, वैज्ञानिक पार्किंग नीति, मल्टी-लेवल पार्किंग, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों को प्राथमिकता देने वाली सड़क डिजाइन तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों के लिए प्रभावी यातायात प्रबंधन रणनीति की आवश्यकता है।

देहरादून साइक्लिंग क्लब ने कहा कि मास्टर प्लान में किफायती आवास (Affordable Housing) पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है। भविष्य के देहरादून में प्रत्येक आय वर्ग के नागरिकों के लिए रोजगार के निकट, सार्वजनिक परिवहन से जुड़े तथा हरित मानकों वाले आवास विकसित किए जाने चाहिए, जिससे अनियोजित कॉलोनियों और लंबी दूरी के आवागमन की समस्या कम हो सके।

क्लब ने यह भी सुझाव दिया कि ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) को केवल घनत्व बढ़ाने तक सीमित न रखकर प्रत्येक कॉरिडोर में पैदल मार्ग, साइकिल ट्रैक, सार्वजनिक परिवहन, पार्क, विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाएं और मिश्रित भूमि उपयोग (Mixed Land Use) सुनिश्चित किया जाए, ताकि नागरिकों को दैनिक आवश्यकताओं के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए मास्टर प्लान में शहरी वन (Urban Forest), रेन गार्डन, ग्रीन रूफ, पारगम्य सड़कें (Permeable Pavements), ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, हीट एक्शन प्लान, बाढ़ प्रबंधन तथा जल संरक्षण को भी प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही प्रत्येक वार्ड में न्यूनतम हरित क्षेत्र, वृक्ष संरक्षण नीति, जैव विविधता कॉरिडोर, आर्द्रभूमि संरक्षण तथा नदी-नालों के किनारे हरित बफर विकसित करने के स्पष्ट प्रावधान होने चाहिए।

देहरादून साइक्लिंग क्लब का मानना है कि भविष्य का शहर केवल वाहनों के लिए नहीं बल्कि लोगों के लिए बनाया जाना चाहिए। यूरोप के सफल शहरों ने “Move People, Not Vehicles” की अवधारणा अपनाई है, जिसमें प्राथमिकता क्रम पैदल यात्री, साइकिल चालक, सार्वजनिक परिवहन, आपातकालीन सेवाएं, माल परिवहन और अंत में निजी वाहन को दिया जाता है। देहरादून को भी इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

क्लब ने कहा कि देहरादून अपनी भौगोलिक स्थिति, अनुकूल जलवायु, शैक्षणिक संस्थानों, वन क्षेत्रों और पर्यटन क्षमता के कारण भारत की पहली साइक्लिंग-फ्रेंडली पर्वतीय राजधानी बनने की क्षमता रखता है। यदि मास्टर प्लान में स्वास्थ्य, सक्रिय परिवहन, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक परिवहन, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन और स्पष्ट लक्ष्य आधारित विकास को प्राथमिकता दी जाती है तो देहरादून न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक आदर्श, स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ शहर बन सकता है।

अंत में देहरादून साइक्लिंग क्लब ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण एवं उत्तराखंड सरकार से आग्रह किया कि जनसुनवाई में प्राप्त सुझावों को गंभीरता से शामिल करते हुए मास्टर प्लान-2041 को जन-केंद्रित, पर्यावरण-अनुकूल, स्वास्थ्य-उन्मुख, वैज्ञानिक, समयबद्ध और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जाए, ताकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, हरित और रहने योग्य देहरादून का निर्माण किया जा सके।

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