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जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर फोकस, सीडीओ ने दिए समन्वित कार्ययोजना के निर्देश

सूखे तालाबों, कुओं और नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए विभागों के बीच तालमेल पर बल

प्राकृतिक जल स्रोतों-नौले-धारे और नदियों-के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्जीवन को लेकर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (सारा) की जिला स्तरीय बैठक ली। उन्होंने सभी रेखीय विभागों को आपसी समन्वय के साथ लक्ष्य निर्धारित कर इंटीग्रेटेड अप्रोच में प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि लघु सिंचाई, वन सहित अन्य विभागों के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं और जनसुझावों के आधार पर ठोस योजना बनाते हुए जल स्रोतों के चिरस्थायी प्रवाह को बनाए रखने पर जोर दिया जाए। उन्होंने वर्षा जल संरक्षण के लिए सघन वृक्षारोपण, खंती, चाल-खाल, चेकडैम तथा अन्य जल संचयन संरचनाओं के निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही चिन्हित जल स्रोतों के कैचमेंट क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण कर ठोस प्रस्ताव तैयार करने को कहा।

अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई एवं नोडल अधिकारी ने बताया कि ‘सारा’ के अंतर्गत जल संरक्षण कार्यों के लिए लघु सिंचाई विभाग को नोडल बनाया गया है। लघु सिंचाई और वन विभाग के माध्यम से स्थलों का चयन कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। वर्षा जल को भूमिगत करने हेतु अब तक 51 रिचार्ज साइट्स स्वीकृत हुई थीं, जिनमें से 22 कार्य पूर्ण हो चुके हैं।

मुख्य विकास अधिकारी ने शेष कार्यों को शीघ्र पूरा करने और नए प्रोजेक्ट्स की डीपीआर जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि जनपद में जल संरक्षण प्रयासों को और गति मिल सके। बैठक में जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, अधिशासी अभियंता विनय कुमार सिंह सहित सभी रेखीय विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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