देहरादून में बढ़ते कंक्रीट के जंगल और ट्रैफिक जाम पर संयुक्त नागरिक संगठन ने जताई चिंता
एमडीडीए अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन, मास्टर प्लान 2041 में पर्यावरण संरक्षण और यातायात सुधार के लिए दिए सुझाव

देहरादून। शहर में तेजी से बढ़ रहे कंक्रीट के जंगल, घटती हरियाली और बढ़ते प्रदूषण को लेकर संयुक्त नागरिक संगठन के एक शिष्टमंडल ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी तथा सचिव मोहन सिंह बनिया से मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने शहर में लगातार बढ़ रही ट्रैफिक जाम की समस्या के समाधान के लिए तत्काल प्रभावी योजनाएं बनाने की मांग की।

एमडीडीए अधिकारियों ने बताया कि दून के भावी मास्टर प्लान-2041 में नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नए एलिवेटेड रोड, फ्लाईओवर, एक्सप्रेसवे, रिंग रोड और बाईपास परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। संगठन के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि शहर की प्रमुख सड़कों के ऊपर एलिवेटेड रोड बनाकर उन्हें आपस में जोड़ा जाए, जिससे यातायात जाम की समस्या का स्थायी समाधान निकल सके।
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों, औद्योगिक क्षेत्रों और शिक्षण संस्थानों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। 400 वर्गमीटर के प्लॉट में फ्रंट लॉन का 10 प्रतिशत भाग हरित क्षेत्र रखना तथा 125 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाया गया है। साथ ही सरकारी विद्यालयों में प्राधिकरण के सहयोग से वृक्षारोपण अभियान भी चलाए जाएंगे।
बैठक के दौरान संगठन ने जनहित में आढ़त बाजार को शीघ्र अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग उठाई, ताकि शहरवासियों को जाम की समस्या से राहत मिल सके। इस पर अधिकारियों ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 1984 में स्थापित एमडीडीए का उद्देश्य देहरादून के सुनियोजित विकास को सुनिश्चित करना था। हालांकि वर्ष 2005-2025 की महायोजना के बाद शहर में हरित क्षेत्रों की जगह तेजी से कंक्रीट संरचनाएं विकसित हुई हैं, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ा है। संगठन ने अनियोजित विकास पर रोक लगाने और पर्यावरण-अनुकूल शहरी नियोजन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।
ज्ञापन में मास्टर प्लान-2041 को हिंदी में तैयार करने, अंतिम स्वीकृति तक बड़े भूमि उपयोग परिवर्तनों पर रोक लगाने, नालों और खालों के दोनों ओर 15 मीटर का “नो-कंस्ट्रक्शन रिपेरियन बफर” घोषित करने, वृक्ष कटान पर 1:10 के अनुपात में प्रतिपूरक वनीकरण और तीन वर्ष तक पौधों के संरक्षण की बैंक गारंटी अनिवार्य करने जैसे सुझाव दिए गए।
इसके अलावा 200 वर्गमीटर से बड़े भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ग्रे-वाटर रीयूज प्रणाली को नक्शा स्वीकृति की पूर्व शर्त बनाने, नई कॉलोनियों में सड़क, नाला और 10 प्रतिशत खुला क्षेत्र पहले विकसित होने के बाद ही स्वीकृति देने तथा सभी कॉलोनियों में एक समान मानक साइनबोर्ड और स्ट्रीट नेम बोर्ड लगाने का प्रस्ताव रखा गया।
संगठन ने “सिटिजन प्लानिंग बोर्ड” और अवैध निर्माणों के निस्तारण हेतु 45 दिनों में निर्णय देने वाली “फास्ट ट्रैक सेल” के गठन की भी मांग की। प्राधिकरण अधिकारियों ने सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।
शिष्टमंडल में गिरीश चंद्र भट्ट, मोहन सिंह खत्री, उमेश सक्सेना, देवेंद्र सिंह राणा, सुशील त्यागी, सत्य प्रकाश चौहान, ठाकुर शेर सिंह, अवधेश शर्मा और चंद्र किरण राणा शामिल थे।