उत्तराखंडहरिद्वार

राजाजी टाइगर रिजर्व में मंत्री के बेटे की शादी पर बवाल: वन निदेशक पर फोड़ा ठीकरा, मंदिर समिति पर मुकदमा दर्ज.

हरिद्वार। उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री खजान दास के बेटे की शादी राजाजी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में आयोजित करने को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब गहरा गया है। भारी विरोध और नियमों के उल्लंघन की खबरों के बीच, पार्क प्रशासन ने आनन-फानन में पंडाल हटवा दिया और मंदिर समिति के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस बीच, कैबिनेट मंत्री ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए वन विभाग के अधिकारियों को ही कठघरे में खड़ा किया है।

​क्या है पूरा मामला?

​विवाद की शुरुआत तब हुई जब हरिद्वार रेंज स्थित प्रसिद्ध सुरेश्वरी देवी मंदिर परिसर में कैबिनेट मंत्री के बेटे की शादी के लिए भव्य तैयारियां शुरू हुईं। टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र होने के बावजूद यहाँ बड़े-बड़े पंडाल, स्टेज, कूलर और भारी-भरकम जनरेटर लगाए गए थे। जैसे ही यह मामला मीडिया और शासन के संज्ञान में आया, वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों ने नियमों की अनदेखी पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

​दबाव बढ़ता देख वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए शनिवार रात ही सारा सामान हटवा दिया। रविवार सुबह सुरक्षा की दृष्टि से पार्क के गेट भी बंद कर दिए गए, जिससे आम श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहर 12 बजे के बाद ही गेट खोले जा सके।

​मंत्री की सफाई: ‘वन निदेशक ने दी थी हामी’

​रविवार दोपहर बेटे और वधू पक्ष के साथ मंदिर पहुंचे कैबिनेट मंत्री खजान दास ने कहा कि पूरे मामले में उन्हें अंधेरे में रखा गया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा:

​”मेरी श्रद्धा मां सुरेश्वरी देवी में है और बेटे की सेहत ठीक होने के कारण हमारी इच्छा मंदिर में ही रस्में निभाने की थी। कुछ दिन पहले जब मैं मंदिर आया था, तब राजाजी के निदेशक भी साथ थे और उन्होंने आयोजन के लिए हामी भरी थी। अगर विभाग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया होता कि यहाँ अनुमति नहीं मिलेगी, तो हम कहीं और व्यवस्था करते।”

​मंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को एक ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया और कहा कि वे स्वयं वन नियमों का सम्मान करते हैं।

​विभाग और मंदिर समिति का पक्ष

​प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (PCCF) रंजन कुमार मिश्र ने स्पष्ट किया कि टाइगर रिजर्व का कोर एरिया होने के कारण यहाँ किसी भी तरह के व्यावसायिक या बड़े निजी आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

​दूसरी ओर, सुरेश्वरी देवी मंदिर समिति के महामंत्री आशीष मारवाड़ी ने कहा कि कार्यक्रम को जरूरत से ज्यादा तूल दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह केवल एक धार्मिक आयोजन और भंडारा था, लेकिन प्रशासन अपनी शक्ति का प्रयोग कर रहा है।

​सादगी से संपन्न हुई रस्में

​विवाद बढ़ने के बाद रविवार को बड़े समारोह की जगह केवल सीमित पूजा-अर्चना और फेरों की रस्म अदा की गई। भारी सुरक्षा और वन कर्मियों की निगरानी के बीच केवल परिवार के चुनिंदा सदस्यों को ही मंदिर परिसर में जाने की अनुमति मिली। फिलहाल, पार्क प्रशासन ने मंदिर समिति के पदाधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ने के आसार हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!