लोकसभा सीटें बढ़ीं, फिर भी क्यों चिंतित है दक्षिण भारत?
815 सीटों के नए फॉर्मूले में जनसंख्या आधारित बंटवारे से बदल सकता है राजनीतिक संतुलन, हिस्सेदारी पर उठे सवाल

केंद्र की मोदी सरकार देश का परिसीमन कराने की तैयारी में है. इसके लिए सरकार ने लोकसभा में परिसीमन बिल 2026 पेश कर दिया है. इसको लेकर दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु काफी चिंतित हैं उनको डर सता रहा है कि इस बिल के पास होने के बाद उनका लोकसभा में प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा. क्या ऐसा वाकई में होगा? या ये सिर्फ अंदेशा है
परिसीमन क्या है और यह क्यों जरूरी है
सबसे पहले जानते हैं कि परिसीमन क्या है? और इसकी जरूरत क्यों है? परिसीमन मुख्य रूप से बढ़ती आबादी के अनुपात में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने की प्रक्रिया है, जो निष्पक्ष लोकतंत्र के लिए आवश्यक है.जनसंख्या में बदलाव के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को निर्धारित करना और सीटों की संख्या तय करने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि हर क्षेत्र में बराबर जनसंख्या हो, ताकि प्रत्येक नागरिक के वोट का मूल्य समान रहे. सभी को समान प्रतिनिधित्व मिले.
परिसीमन विधेयक 2026 क्या है
परिसीमन विधेयक 2026 महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित है. दरअसल, महिला आरक्षण बिल यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में पारित हो चुका है.इसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया है. लेकिन, इसे लागू करने के लिए नई जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था. जिसके लिए ही ये परिसीमन विधेयक 2026 सरकार 3 दिवसीय विशेष सत्र में लेकर आई है.