उत्तराखंड में तंबाकू-निकोटीन युक्त गुटखे पर एक साल की रोक, सरकार को 40 करोड़ के राजस्व का अनुमानित नुकसान

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा, पान मसाला व अन्य संबंधित खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। 13 अक्टूबर 2026 से लागू इस आदेश के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं, व्यापारियों ने दुकानों में पहले से मौजूद स्टॉक के निपटारे के लिए सरकार से समय देने की मांग की है।
40 करोड़ रुपये के राजस्व पर पड़ेगा असर
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त विनय शंकर पांडेय के आदेश के बाद प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री पर निगरानी बढ़ा दी गई है। विभाग के अनुसार, नियमों के दायरे में आने वाले उत्पादों की बिक्री या भंडारण पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
इन उत्पादों से राज्य को सालाना करीब 40 करोड़ रुपये के जीएसटी राजस्व का अनुमान है। इसमें लगभग 20 करोड़ रुपये राज्य और इतनी ही राशि केंद्र के हिस्से में जाती है। प्रतिबंध से कारोबारियों के साथ सरकारी राजस्व भी प्रभावित होने की आशंका है।
व्यापारियों ने मांगी मोहलत
देहरादून व्यापार मंडल की महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष मधु गुप्ता ने प्रतिबंध का स्वागत करते हुए कहा कि स्वास्थ्य की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, उन्होंने सरकार से दुकानदारों को मौजूदा स्टॉक के प्रबंधन के लिए कुछ समय देने की मांग की। उनके मुताबिक, छोटे दुकानदारों की आय पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
कैंसर के खतरे को देखते हुए फैसला
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. दौलत सिंह के अनुसार, तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। उन्होंने लोगों को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की जरूरत बताई।
एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि 14 अक्टूबर से बाजारों में जांच अभियान शुरू कर दिया गया है। प्रतिबंधित उत्पाद बेचने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सरकार के इस फैसले को जनस्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब निगरानी, नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापारियों के मौजूदा स्टॉक के निपटारे को लेकर आगे की व्यवस्था अहम होगी।