Uncategorized

जबलपुर क्रूज हादसे के बाद उत्तराखंड में अलर्ट, राफ्टिंग-बोटिंग सुरक्षा पर सवाल

उत्तराखंड में वाटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर के लिए बढ़ती भीड़ और कमज़ोर निगरानी के बीच जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है

30 अप्रैल को जबलपुर में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. इस हादसे में कई लोगों की जान चली गई. इस घटना ने न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि उन सभी राज्यों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां जल पर्यटन और एडवेंचर गतिविधियां बड़े स्तर पर संचालित होती हैं.यह हादसा एक चेतावनी की तरह सामने आया है कि अगर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती रही, तो ऐसे हादसे कभी भी दोहराए जा सकते हैं. खास बात यह है कि किसी हादसे के बाद ही सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाई जाती है, जबकि पहले से कोई ठोस तैयारी नजर नहीं आती है. ऐसा ही कुछ हो रहा है उत्तराखंड में भी.उत्तराखंड जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और साहसिक पर्यटन के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है, अब इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में आ गया है. ऋषिकेश में गंगा नदी पर राफ्टिंग, नैनीताल की झीलों में बोटिंग और टिहरी झील में वॉटर स्पोर्ट्स ये सभी गतिविधियां राज्य की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं. हर साल लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं. लेकिन इतनी बड़ी संख्या में आने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम हैं. यह अब एक गंभीर बहस का विषय बन गया है.बढ़ती भीड़ और कमज़ोर निगरानी के बीच जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है. हम ये बात इसलिए कह रहे हैं कि जबलपुर हादसे के कुछ ही घंटों बाद उत्तराखंड के टिहरी बांध की झील में भी एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया था. तेज हवाओं के कारण झील के बीच बने हट्स अचानक एक दूसरे से अलग हो गए थे और पानी में मौजूद पर्यटकों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया था. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि SDRF को तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा और करीब 30 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इसने यह साफ कर दिया कि अगर समय पर मदद न पहुंचती तो हालात भयावह हो सकते थे.

ऋषिकेश में सख्ती, राफ्टिंग कंपनियों पर कार्रवाई: इन घटनाओं के बाद प्रशासन हरकत में आया और ऋषिकेश में राफ्टिंग गतिविधियों की जांच शुरू की गई. जांच में सामने आया कि कई राफ्टिंग कंपनियां सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कर रही थीं. पर्यटकों को बिना लाइफ जैकेट और हेलमेट के ही नदी में उतारा जा रहा था, जो सीधे तौर पर उनकी जान को खतरे में डालने जैसा है. इस लापरवाही पर कार्रवाई करते हुए चार राफ्टिंग कंपनियों पर 15 दिनों के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है. साथ ही प्रशासन ने सभी ऑपरेटरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे तय मानकों और SOP का पालन करें, अन्यथा आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

एसओपी बनाने की मांग बढ़ी:

 इन तमाम घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिरकार अब तक राज्य में एक स्पष्ट और सख्ती से लागू होने वाली SOP क्यों नहीं बन पाई है. जब लगातार हादसे सामने आ रहे हैं, चेतावनी के संकेत मिल रहे हैं और पर्यटकों की जान जोखिम में पड़ रही है, तब भी नियमों का जमीन पर सही तरीके से लागू न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!