वैशाख पूर्णिमा पर खुलेंगे लाटू देवता मंदिर के कपाट
अनोखी परंपरा: पुजारी आंखों पर पट्टी बांधकर करते हैं पूजा, श्रद्धालु दूर से ही करते हैं दर्शन

लाटू देवता मंदिर के कपाट इस साल 1 मई, वैशाख पूर्णिमा के दिन विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे. चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के वांण गांव स्थित यह मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए जाना जाता है.
कपाट खुलने का समय दोपहर 1 बजे तय किया गया है. खास बात यह है कि इस बार पहली बार दो दिवसीय मेले का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे.


इस मंदिर की सबसे खास परंपरा यह है कि यहां के पुजारी पूजा के दौरान आंखों और मुंह पर पट्टी बांधकर गर्भगृह में प्रवेश करते हैं. वहीं श्रद्धालुओं को भी मंदिर से एक निश्चित दूरी—करीब 50 मीटर दूर से ही हाथ जोड़कर प्रार्थना करनी होती है. आज तक किसी आम व्यक्ति ने मंदिर के भीतर देवता के स्वरूप के दर्शन नहीं किए हैं.
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार लाटू देवता को मां नंदा राजराजेश्वरी का धर्म भाई माना जाता है और नंदा राजजात यात्रा में उनकी विशेष भूमिका होती है.
इस बार मंदिर समिति और ग्रामीणों ने मिलकर एक अहम फैसला लेते हुए मंदिर परिसर में पशु बलि पर पूरी तरह रोक लगा दी है. अब भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर केवल सात्विक पूजा-अर्चना ही करेंगे.
लाटू देवता मंदिर की ये परंपराएं और मान्यताएं इसे उत्तराखंड के प्रमुख आस्था केंद्रों में खास बनाती हैं, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.