
देहरादून।
15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) से ठीक पहले शहर में डेंगू एवं मलेरिया की रोकथाम के लिए नगर निगम देहरादून द्वारा महापौर सौरभ थपलियाल एवं नगर आयुक्त आलोक पांडे के दिशा-निर्देशों में कोल्ड फॉगिंग मशीन का एक माह का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत मशीन का डेमो लिया गया, ताकि इसकी कार्यक्षमता एवं प्रभावशीलता का परीक्षण किया जा सके।
इस मौके पर मेयर सौरभ थपलियाल ने बताया कि वर्तमान में फॉगिंग के दौरान कीटनाशक दवाइयों को डीजल के साथ मिलाकर प्रयोग किया जाता है। डीजल आधारित फॉगिंग से निकलने वाला धुआं एवं प्रदूषण विशेष रूप से सांस संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम द्वारा पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य के अनुकूल विकल्प के तौर पर कोल्ड फॉगिंग तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है।

नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय ने बताया कि नगर निगम द्वारा पहले इस्तेमाल की जा रही फॉगिंग तकनीक इंडोर क्षेत्रों में उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं थी, जबकि वर्तमान में डेमो के लिए लाई गई नई कोल्ड फॉगिंग मशीन की खासियत यह है कि इसका उपयोग इंडोर और आउटडोर, दोनों स्थानों पर किया जा सकता है। इससे घरों, संस्थानों एवं अन्य बंद परिसरों के साथ-साथ खुले क्षेत्रों में भी मच्छर नियंत्रण के लिए इसका उपयोग किया जा सकेगा।उन्होंने बताया कि कोल्ड फॉगिंग मशीन के माध्यम से कीटनाशक दवा की महीन बूंदों का छिड़काव किया जाता है, जिससे मच्छरों के नियंत्रण में मदद मिलती है और डीजल आधारित फॉगिंग की आवश्यकता नहीं रहती। यह तकनीक दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी उपयोग में लाई जा रही है।

इस दौरान मुख्य नगर स्वास्थ अधिकारी डॉ. आनंद शुक्ला ने कहा कि नगर निगम देहरादून का उद्देश्य डेंगू-मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के साथ-साथ डीजल आधारित फॉगिंग से होने वाले प्रदूषण को कम करते हुए शहरवासियों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना है।

पायलट प्रोजेक्ट के दौरान निर्धारित कीटनाशक दवाओं, जिनमें एक्वाथ्रीन (Aquathrin) और बीलार्वा (Bilarva) शामिल हैं, का उपयोग किया जाएगा। इन दवाओं का छिड़काव निर्धारित मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अगले एक माह तक चलने वाले इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत कोल्ड फॉगिंग मशीन की प्रभावशीलता, मच्छर नियंत्रण क्षमता तथा इंडोर और आउटडोर दोनों परिस्थितियों में इसकी उपयोगिता का आकलन किया जाएगा।