UKSSSC पेपर लीक मामले में तीन आरोपियों पर तय होंगे आरोप, 18 अगस्त को होगी सुनवाई
देहरादून की विशेष CBI अदालत ने माना—सुमन, मोहम्मद खालिद और साबिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत; परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र की तस्वीरें WhatsApp पर भेजने का आरोप

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UKSSSC की स्नातक स्तरीय परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामले में देहरादून की विशेष CBI अदालत ने तीन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने माना कि रिकॉर्ड पर आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री मौजूद है। अब 18 अगस्त 2026 को आरोप गठन की कार्यवाही होगी।
मामले में सुमन, मोहम्मद खालिद और साबिया आरोपी हैं। CBI की जांच के मुताबिक, 21 सितंबर 2025 को आयोजित UKSSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र के तीन पन्नों की तस्वीरें खींचकर WhatsApp के जरिए सुमन तक भेजी गई थीं। आरोप है कि इसके बाद सुमन ने कुछ बहुविकल्पीय सवालों के जवाब भी WhatsApp पर भेजे।
खालिद पर परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र की तस्वीरें लेने का आरोप
जांच में सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार, मोहम्मद खालिद खुद इस परीक्षा में अभ्यर्थी था और उसका परीक्षा केंद्र आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज, बहादुरपुर जट में बनाया गया था। केंद्र पर निगरानी के लिए 15 कैमरे लगाए गए थे।
आरोप है कि परीक्षा शुरू होने के बाद खालिद ने प्रश्नपत्र के तीन पन्नों की तस्वीरें खींचीं और करीब 11:30 बजे वॉशरूम गया। इसी दौरान तस्वीरें WhatsApp के जरिए सुमन तक पहुंचीं और सुमन ने कुछ सवालों के उत्तर भेजे।
सुमन ने दी थी अलग सफाई
अदालत में सुमन की ओर से दावा किया गया कि उसे शुरू में यह जानकारी नहीं थी कि उसी दिन UKSSSC की परीक्षा हो रही है। उसका कहना था कि खालिद ने WhatsApp पर बताया था कि उसकी बहन का पेपर है और उससे 20 बहुविकल्पीय प्रश्नों के जवाब देने को कहा था। बातचीत के दौरान बाद में उसे परीक्षा के बारे में जानकारी हुई।
हालांकि, CBI ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अभियोजन का कहना है कि सुमन को भेजे गए प्रश्नपत्र के पन्ने पर परीक्षा का QR कोड मौजूद था। CBI के मुताबिक, प्रश्नपत्र और उसके उत्तरों से संबंधित WhatsApp संदेश भी सुमन ने अपने मोबाइल से तुरंत डिलीट कर दिए और पुलिस को सूचना देने के बजाय यह जानकारी बॉबी पंवार को भेजी।
अदालत ने माना प्रथम दृष्टया मामला बनता है
विशेष न्यायाधीश CBI मदन राम ने केस डायरी और उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद कहा कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री मौजूद है। अदालत ने माना कि सुमन को भेजे गए पन्ने वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र के थे और उनके जवाब भेजना प्रतियोगी परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़ा कृत्य है।
CBI ने जांच पूरी करने के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और
उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 की धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है।
अब मामले में अगली अहम कार्रवाई 18 अगस्त 2026 को आरोप गठन के दौरान होगी।