उत्तराखंड

एम्स ऋषिकेश में खरीदारी और टेंडर में घोटाले की जांच  

सीबीआइ ने एम्स के सात बड़े अधिकारियों पर दर्ज किए मुकदमे

 

ऋषिकेश। सीबीआइ ने एम्स ऋषिकेश के सात बड़े अधिकारियों के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमेे दर्ज किए हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में खरीदारी और टेंडर आवंटन में हुए घोटालों की जांच के बाद सीबीआइ के इस कदम से हड़कंप मच गया है। मामले में सीबीआइ ने एम्स के तत्कालीन अतिरिक्त प्रोफेसरों और अन्य के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। जिनमें तत्कालीन अतिरिक्त प्रोफेसर, तत्कालीन सहायक प्रोफेसर, तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी, एम्स के तत्कालीन लेखा अधिकारी और नई दिल्ली स्थित निजी फर्म के मालिक शामिल हैं।
सीबीआइ की दस्तक के बाद फिर से हड़कंप
सीबीआइ की टीम ने शुक्रवार को सभी आरोपितों के ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। आरोप है कि आरोपितों ने निविदा प्रक्रिया से संबंधित भारत सरकार के दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया। उन्?होंने फर्जी आधार पर प्रतिष्ठित बोलीदाताओं की बेईमानी से जांच की और उन फर्मों को अनुमति दी, जिन्होंने अपने दस्तावेजों में तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया था।यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपितों ने इन निविदाओं में कार्टेल गठन के अस्तित्व को जानबूझकर नजरअंदाज किया। इसके बाद आरोपित ने कथित तौर पर अपराध के महत्वपूर्ण सबूतों को गायब कर दिया। रोड स्वीपिंग मशीन की खरीद में 2.41 करोड़ रुपये (लगभग) और केमिस्ट शाप की स्थापना के लिए टेंडर के पुरस्कार में दो करोड़ रुपये (लगभग) का कथित नुकसान एम्स को हुआ।दोनों मामलों में आज उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली सहित 24 अलग-अलग स्थानों पर तलाशी ली जा रही है। जांच जारी है।

मुनिकीरेती क्लीनिक पर भी सीबीआइ की टीम पहुंची
आरोपित अपने ठिकानों से गायब हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक एम्स प्रशासन से जुड़ी एक महिला अधिकारी के पति जो ऋषिकेश के एक डेंटल कालेज में बड़े पद पर हैं। उनके घर और मुनिकीरेती क्लीनिक पर भी सीबीआइ की टीम पहुंची है। इसके साथ ही इस कैंपस में रहने वाले आरोपितों के यहां भी सीबीआइ की टीम कार्रवाई कर रही है। ऋषिकेश के भीतर स्थित प्राइवेट मेडिकल स्टोर में भी सीबीआइ की टीम पहुंची है।

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