उत्तराखंड

उत्तराखंड में महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम को लेकर घमासान भाजपा- कांग्रेस आमने सामने

उत्तराखंड में महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है.

महिला आरक्षण से जुड़े नारी वंदन संशोधन विधेयक के संसद में पारित न हो पाने के बाद देशभर की राजनीति गरमा गई है। उत्तराखंड में भी इस मुद्दे ने सियासी रंग ले लिया है, जहां सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एक-दूसरे पर हमलावर हैं। विवाद की सबसे बड़ी वजह परिसीमन को बताया जा रहा है, जिसने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है।दरअसल, कांग्रेस ने शुरुआत में महिला आरक्षण के प्रावधान का समर्थन किया था, लेकिन जैसे ही इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया, विपक्ष ने इसका विरोध करते हुए मतदान में बिल के खिलाफ रुख अपनाया। यही कारण है कि अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर परिसीमन इस कानून के लागू होने में बाधा क्यों बन रहा है और इससे राज्यों की राजनीतिक तस्वीर किस तरह बदल सकती है।विधेयक पारित न होने के बाद भाजपा ने विपक्ष के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। पार्टी ने इसे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के ऐतिहासिक अवसर को रोकने की कोशिश बताया है। इसी के तहत भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने देशभर में अभियान चलाने का ऐलान किया है। पार्टी ने अपनी राज्य इकाइयों को जिला स्तर पर प्रदर्शन आयोजित करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि विपक्ष की भूमिका को जनता के सामने लाया जा सके।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह अभियान केवल मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी चुनावों की रणनीति का भी हिस्सा है। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा इस मुद्दे को जन आंदोलन का रूप देने की तैयारी में है।अगर विधेयक की बात करें तो इसे पारित करने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, जो सरकार जुटाने में असफल रही। इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया को परिसीमन से जोड़ना था। प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और नए सिरे से निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण की बात भी शामिल थी।

बताया जा रहा है कि परिसीमन लागू होने के बाद देश का राजनीतिक संतुलन काफी हद तक बदल सकता है। लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ राज्यों की हिस्सेदारी और बहुमत का आंकड़ा भी बदल जाएगा, जिससे चुनावी समीकरण पर बड़ा असर पड़ना तय है। यही कारण है कि विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है।चारधाम यात्रा के शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं को आरक्षण देने का ऐतिहासिक अवसर विपक्ष की नकारात्मक राजनीति के कारण हाथ से निकल गया। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय करार दिया।वहीं, उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी ने भी इस घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि संसद में इतिहास रचने का मौका चूक गया, जिससे महिलाओं में निराशा है।

दूसरी ओर, कांग्रेस का कहना है कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि सरकार के तरीके पर सवाल उठा रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण लागू करने के बजाय सीटों की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रही है, जिसका उद्देश्य स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू किया जा सकता है।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता करन माहरा ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा महिलाओं के मुद्दे पर राजनीति कर रही है और जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।कुल मिलाकर, महिला आरक्षण पर सहमति के बावजूद इसके क्रियान्वयन के तरीके को लेकर गहराता विवाद अब उत्तराखंड की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी बहस का केंद्र बन सकता है।

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