
उत्तराखंड सरकार इस बार चारधाम यात्रा को केवल आस्था का नहीं, बल्कि स्वच्छता का भी उदाहरण बनाने की दिशा में काम कर रही है। हाल ही में देहरादून प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देवभूमि को साफ और प्लास्टिक मुक्त रखने का जो संदेश दिया, उसके बाद राज्य में तैयारियां तेज़ हो गई हैं।हर साल लाखों श्रद्धालु बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले यात्रियों के कारण यात्रा मार्गों पर कचरे का दबाव बढ़ता है, खासकर सिंगल-यूज प्लास्टिक एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। इस बार प्रशासन ने पहले से ही इस समस्या को नियंत्रित करने की ठोस रणनीति पर काम शुरू कर दिया है ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि यात्रा के दौरान स्वच्छता व्यवस्था में किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर तालमेल के साथ काम करने और प्लास्टिक मुक्त यात्रा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।इस अभियान के संचालन की जिम्मेदारी उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपी गई है। बोर्ड एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है, जिसमें यात्रा मार्गों पर प्लास्टिक के इस्तेमाल को सीमित करने, कचरा संग्रहण और उसके व्यवस्थित निस्तारण पर खास ध्यान दिया जा रहा है।योजना के तहत यात्रा रूट पर सिंगल-यूज प्लास्टिक पर सख्ती बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही कपड़े या कागज के बैग, बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग जैसे विकल्पों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि यात्रियों और स्थानीय कारोबारियों को व्यवहारिक समाधान मिल सके।कचरा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए धामों और प्रमुख पड़ावों पर अतिरिक्त डस्टबिन और कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। साथ ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करने की व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे निस्तारण प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सके।
सरकार जागरूकता को भी इस अभियान का अहम हिस्सा मान रही है। यात्रा शुरू होने से पहले और यात्रा के दौरान विभिन्न माध्यमों से लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने और प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने यहां सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करें और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाएं। साथ ही, वे अपने ग्राहकों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करें।प्रशासन का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से यह अभियान सफल नहीं हो सकता। इसके लिए स्थानीय लोगों, व्यापारियों और यात्रियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।